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Wednesday, 2 November 2016

Gk questions related to Rajasthan development

जयपुर को नौ वगों के सिद्धांत पर बसाने वाला महान शिल्पकार - Great architect who settled the Jaipur on the principles of nine classes - विद्याधर भट्टाचार्य Vidhyadhar / Vidyadhar Bhattacharya सवाई जयसिंह के कल्पनानुसार जयपुर शहर की नींव रखी गई Who laid the foundation of Jaipur city during the reign of Sawai Jaisingh II in 1727? राजगुरु पंडित जगन्नाथ सम्राट द्वारा By Rajguru Pandit Jagannath Samrat पत्थर की जाली एवं कटाई के कारण संसार की प्रसिद्ध हवेली Haveli renowned for its intricate yellow sandstone-carved jharokhas or balconies. पटवों की हवेली (जैसलमेर) Patwon ki Haveli, Jaisalmer. डीग के महल (भारतीय एवं इस्लामी कला का समन्वय) स्थित है Deeg Palace (known for coordination of Indo-Islamic Art) are situated in डीग (भरतपुर) में Deeg (Bharatpur) रानी की बावड़ी, संठ की बावड़ी तथा हाड़ी रानी का कुण्ड स्थित है Raniji ki Baori (Queen's Stepwell), Sant ki Baori and Hari (Hadi) Rani Kund are located in टोडारायसिंह में Todaraisingh (Tonk) ‘सभी किलों का सिरमौर’ कहा जाता है Which fort is called "Champagne of Forts" चित्तौड़गढ़ दुर्ग Chittorgarh fort किलो अलखणो यू कहे, आव कला राठौड़। मो सिर उतरे मोहणो, तो सिर बंधै मौड़।। यह लोक प्रसिद्ध दोहा किस दुर्ग से संबंधित है? Kilo Alakhano Yu Kahe, Aav Kalla Rathore. Mo Sir Utre Mohno, To Sir Bandhe Mour. To which fort this couplet is realted? सिवाणा दुर्ग Siwana Fort अजमेर का तारागढ़ किला इस नाम से जाना जाता है Taragarh Fort of Ajmer is also known as गढ़बीठली Garhbithli तारागढ़ का निर्माण किसने करवाया था? Who built Taragarh Fort? चौहान शासक अजयपाल ने Chouhan King Ajaypal 1452 ई. के लगभग राणा कुंभा द्वारा परमार शासकों द्वारा निर्मित आबू के पुराने किले के भग्नावशेषों पर किस दुर्ग का निर्माण करवाया गया? अचलगढ़ जोधपुर के संस्थापक राव जोधा ने विक्रम संवत 1515 (1458 ई.) में जिस दुर्ग का निर्माण करवाया वह है मेहरानगढ़ (जोधपुर) चिडि़या अूंक पहाड़ी पर स्थित मेहरानगड़ का एक नाम यह भी है मयूरध्वज गढ़ ‘भगनो विद्युत मंडलाकुति गढ़ी जित्वा समस्तना रीन।’ यह उक्ति जिस दुर्ग के संबंध में कही गई है मेवाड़ का मांडलगढ़ यहां का जगतशिरोमणी मंदिर हिंदु स्थापत्य कलाकी अनुपम कृति है आमेर (जयपुर) एशिया की सबसे बड़ी जयबाण तोप यहां है जयगढ़ (जयपुर) सवाई जयसिंह ने मराठों के विरूद्ध सुरक्षा के लिए कौनसा दुर्ग बनवाया था नाहरगढ़ (सुदर्शनगढ़) आमेर गागरौण का सुप्रसिद्ध दुर्ग स्थित है झालावाड़ में 1155 ई. में रावल जैसल द्वारा स्थापित जैसलमेर का प्रसिद्ध दुर्ग है सोनारगढ़ या सेनगढ़ सोनगढ़ किस केटी का दुर्ग है धान्वन कोटी का भाटियों की वीरता का साक्षी भटनेर का प्राचीन दुर्ग स्थित है हनुमानगढ़ लाल पत्थरों से निर्मित बीकानेर स्थित दुर्ग जुनागढ़ 1733 ई. में महाराजा सुरजमल द्वारा निर्मित भूमि दुर्ग है लोहागढ़ (भरतपुर)

Thursday, 4 August 2016

राजस्थान के इतिहास से संबंधित प्रमुख साहित्यिक कृतियां

हमीर महाकाव्य: नयनचंद्र सूरी द्वारा रचित इस महाकाव्य में रणथंभौर के चैहान शासकों विशेषकर राव हमीर देव चैहान की वीरता एवं उसका अलाउद्धीन खिलजी के साथ हुए युद्ध का वर्णन है।

राजवल्लभ: महाराणा कुंभा के शिल्पी मंडन द्वारा रचित इस ग्रंथ में तात्कालिन समय की वास्तुकला व शिल्पकला का पता चलता है।

एकलिंग महात्म्य: मेवाड़ के सिसोदिया वंश की वंशावलि बताने वाले इस ग्रंथ का रचयिता मेवाड़ महाराणा कुंभा का दरबारी ‘कान्हा व्यास’ माना जाता है।

पृथ्वीराज विजय: 12 वीं सदी में जयानक द्वारा रचित इस ऐतिहासिक ग्रंथ में प्रमुख रूप से अजमेर के शासक पृथ्वीराज चौहान तृतीय के गुणों व पराक्रम का वर्णन है।

सुर्जन चरित्र: कवि चंद्रशेखर द्वारा रचित इस ग्रंथ मं बूदी रियासत के शासक राव सुर्जन हाड़ा के चरित्र का वर्णन किया गया है।

भट्टि काव्य: भट्टिकाव्य नामक इस ग्रंथ में 15वीं सदी के जैसलमेर राजा के सामाजिक व राजनीतिक जीवन का वर्णन है।

राजविनोद: भट्ट सदाशिव द्वारा बीकानेर के राव कल्याणमल के समय रचित इस ग्रंथ में 16वीं शताब्दी के बीकानेर राज्य के सामाजिक, राजनीति व आर्थिक जीवन का वर्णन मिलता है।

कर्मचंद वंशोत्कीतर्न काव्यम: जयसोम द्वारा रचित इस ग्रंथ में बीकानेर रियासत के शासकों का वर्णन है।

अमरकाव्य वंशावली: रणछोड़दास भट्ट द्वारा रचित इस ग्रंथ में मेवाड़ सिसोदिया शासकों की उपलब्धियों का वर्णन मिलता है।

कान्हड़दे प्रबंध: इस ग्रंथ के रचयिता जालौर रियासत के शासक अखैराज सोनगरा के दरबारी कवि पदमनाभ है। इसमें जालौर के वीर सोनगरा चैहान शासक कान्हड़देवे व अलाउद्धीन खिलती के मध्य हुए युद्ध का वर्णन है।

हम्मीरायण: कवि पद्मनाभ द्वारा रचित इस ग्रंथ में जालोर रियासत के शासकों का वर्णन किया गया है।

पृथ्वीराज रासौ: पिंगल में रचित इस महाकाव्य के रचयिता चंदबरदाई है। इसमें अजमेर के अंतिम चैहान शासक पृथ्वीराज तृतीय के जीवन चरित्र एवं युद्धों का वर्णन है। यह शौर्य-श्रृंगार, युद्ध प्रेम व जय-विजय का अनूठा चरित्र काव्य है।

खुमाण रासौ: दलपति विजय द्वारा रचित पिंगल भाषा के इस ग्रंथ में मेवाड़ के बप्पा रावल से लेकर महाराणा राजसिंह तक के मेवाड़ शासकों का वर्णन है।

विरूद छतहरी व किरतार बावनी: अकबर के दरबारी कवि दुरसा आढा द्वारा रचित विरूद छतहरी में महाराणा प्रताप की शौर्य गाथा है।

बीकानेर रा राठौड़ा री ख्यात (दयालदास री ख्यात): बीकानेर रियासत के शासक रतनसिंह के दरबारी कवित दयालदास द्वारा रचित दो खंडों के इस ग्रंथ में जोधपुर व बीकानेर के राठौड़ शासकों के प्रारंभ से लेकर बीकानेर महाराजा सरदारसिंह तक की घटनाओं का वर्णन है।

सगत रासौ: गिरधर आसिया द्वारा रचित इस डिंगल ग्रंथ में महाराणा प्रताप के छोटे भाई शक्तिसिंह का वर्णन है। यह डिंगल भाषा में लिखा गया प्रमुख रासौ ग्रंथ है।

हमीर रासौ: जोधराज द्वारा रचित इस ग्रंथ में रणथंभौर के चैहान शासक राव हमीरदेव चैहान की वंशावली, अलाउद्धीन खिलती से हुए युद्ध व हमीर की वीरता का विस्तृत विवरण दिया गया है।

बांकीदास री ख्यात: जोधपुर महाराज मानसिंह के काव्य गुरू बांकीदास द्वारा रचित यह ख्यात राजस्थान का इतिहास जानने का प्रमुख स्रोत है। इनकी एक अन्य रचना बांकीदास की बांता मंे राजपूत वंशों से संबंधित लगभग 2000 लघु कथाओं का संग्रह है।

वीर विनोद: मेवाड़ महाराणा सज्जनसिंह (शंभूसिंह) के दरबारी कविराज श्यामलदास ने अपने इस विशाल ऐतिहासिक ग्रंथ की रचना महाराणा सज्जनसिंह के आदेश पर प्रारंभ की। चार खंडों में रचित इस ग्रंथ पर कविराज श्यामलदास का ब्रिटिश सरकार द्वारा केसर-ए-हिंद की उपाधि प्रदान की गई। इस ग्रंथ में मेवाड़ के विस्तृत इतिहास सहित अन्य संबंधित रियासतों का भी वर्णन है। मेवाड़ महाराणा सज्जनसिंह ने श्यामलदास को कविराज व महामहोपाध्याय की उपाधि से विभूषित किया था।

बातां री फुलवारी: आधुनिक काल के प्रसिद्ध राजस्थानी कथा साहित्यकार विजयदान देथा द्वारा रचित इस रचना में राजस्थानी लोक कलाओं का संग्रह किया गया।

मुहणौत नैणसी री ख्यात: राजस्थान के अबुल फजल के नाम से प्रसिद्ध एवं जोधपुर महाराज जसवंतसिंह प्रथम के प्रसिद्ध दरबारी (दीवान) मुहणौत नैणसी द्वारा रचित इस ग्रंथ मंे राजस्थान के विभिन्न राज्यों के इतिहास (विशेषतः मारवाड़) एवं 17 वीं शताब्दी के राजपूत मुगल संबंधों पर विस्तृत प्रकाश डाला गया है। इसे जोधपुर का गजेटियर कहा जाता है।

मारवाड़ रा परगना री विगत: मुहणौत नैणसी द्वारा रचित इस ग्रंथ में मारवाड़ रियासत के इतिहास पर पर्याप्त प्रकाश डाला गया है। मारवाड़ रा परगना री विगत को राजस्थान का गजेटियर कहा जाता है।

पदमावत महाकाव्य: मलिक मोहम्मद जायसी द्वारा सन 1540 ई के लगभग रचित इस महाकाव्य में अलाउद्धीन खिलजी एवं मेवाड़ शासक रावल रतनसिंह के मध्य 1301 ई में हुए युद्ध का वर्णन है।

ढोला मारू रा दूहा: कवि कल्लोल द्वारा रचित डिंगल भाषा के श्रृंगार रस से परिपूर्ण इस ग्रंथ में गागरोन के शासक ढोला व मारवण के प्रेम प्रसंग का वर्णन है।

सूरस प्रकास: जोधपुर महाराजा अभयसिंह के दरबारी कवि करणीदान कविया द्वारा रचित इस ग्रंथ में जोधपुर के राठौड़ वंश के प्रारंभ से लेकर महाराजा अभयसिंह के समय तक की घटनाओं का वर्णन है।

विजयपाल रासौ: विजयगढ (करौली) के यदुवंशी नरेश विजयपाल के आश्रित कवि नल्लसिंह भट्ट द्वारा रचित पिंगल भाषा के इस वीर रसात्मक ग्रंथ में विजयगढ (करौली) के शासक विजयपाल यादव की दिग्विजयों का वर्णन है।

नागर समुच्चय: यह ग्रंथ किशनगढ के शासक सांवतसिंह उर्फ नागरीदास की विभिन्न राधा-कृष्ण प्रेम विषयक रचनाओं का संग्रह है।

वेलि क्रिसन रूकमणी री: मुगल सम्राट अकबर के दरबारी नवरत्नों में से एक एवं बीकानेर महाराजा रायसिंह के छोटे भाई पृथ्वीराज राठौड़ द्वारा रचित डिंगल भाषा के इस सुप्रसिद्ध ग्रंथ में श्रीकृष्ण एवं रूकमणि के विवाह की कथा का वर्णन किया गया है। दुरसा आढा ने इस ग्रंथ को 5वां वेद एवं 19वां पुराण कहा है। यह राजस्थान में श्रृंगार रस की सर्वश्रेष्ठ रचना है। पीथल के नाम से साहित्य रचना करने वाले पृथ्वीराज राठौड़ को डाॅ. टेस्सिटोरी ने डिंगल का हैरोस कहा है।

बिहारी सतसई: जयपुर महाराज मिर्जा राजा जयसिंह के प्रसिद्ध दरबारी महाकवि बिहारीदास द्वारा ब्रजभाषा में रचित यह प्रसिद्ध ग्रंथ श्रृंगार रस की उत्कृष्ट रचना है।

ढोला मारवणी री चैपाई (चड़पही): इस ग्रंथ की रचना कवि हरराज द्वारा जैसलमेर के यादवी वंशी शासकों के मनोरंजन के लिए की गई।

कुवलयमाला: 8वीं शताब्दी के इस प्राकृत ग्रंथ की रचना उद्योतन सूरी ने की थी।

ब्रजनिधि ग्रंथावलि: जयपुर महाराजा प्रतापसिंह कच्छवाह द्वारा रचित काव्य ग्रंथों का संकलन। ये ब्रजनिधि के नाम से संगीत काव्य रचना करते थे।

हमीर हठ: बूंदी के हाड़ा शासक राव सुर्जन के आश्रित कवि चंद्रशेखर द्वारा रचित है।

राजपूताने का इतिहास व प्राचीन लिपिमाला: इनके रचयिता राजस्थान के प्रसिद्ध इतिहासकार पंडित गौरीशंकर हीराशंकर ओझा है। जिन्होने हिंदी में सर्वप्रथम भारतीय लिपि का शास्त्र लेखन कर अपना नाम गिनिज बुक में दर्ज करवाया। इन्होने राजस्थान के देशी राज्यों का इतिहास भी लिखा। इनका जन्म सिरोही जिले के रोहिड़ा नामक कस्बे में हुआ।

सिरोही राज्य का इतिहास: पं. गौरीशंकर हीराचंद ओझा द्वारा रचित

तारीख-उल-हिंद: अलबरूनी द्वारा लिखित इस ग्रंथ से 1000 ई.के आसपास की राजस्थान की सामाजिक व आर्थिक स्थिति के बारे में जानकारी मिलती है।

तारीख-ए-अलाई (ख्जाइन उल फुतूह): अमीर खुसरों द्वारा रचित इस ग्रंथ में अलाउद्धीन खिलजी एवं मेवाड़ के राणा रतनसिंह के मध्य सन 1303 में हुए युद्ध व रानी पद्मिनी के जौहर का वर्णन मिलता है।

तारीख-ए-फिरोजशाही: जियाउद्धीन बरनी द्वारा लिखित इस ग्रंथ से रणथंभौर पर हुए मुस्लिम आक्रमणों की जानकारी मिलती है।

तारीख-ए-शेरशाही: अब्बास खां सरवानी द्वारा लिखित इस ग्रंथ में शेरशाह सूरी एवं मारवाड़ के शासक राव मालदेव के मध्य सन 1544 ई में हुए गिरी सुमेल के युद्ध का वर्णन किया गया है। सरवानी इस युद्ध का प्रत्यक्षदर्शी था।

राठौड़ रतनसिंह महेस दासोत री वचनिका: जग्गा खिडि़या द्वारा रचित डिंगल भाषा के इस ग्रंथ से जोधपुर शासक जसवंतसिंह के नेतृत्व में मुगल सेना एवं मुगल सम्राट शाहजहां के विद्रेाही पुत्र औरंगजेव व मुराद की संयुक्त सेना के बीच हुए धरमत (उज्जैन) के युद्ध में राठौड़ रतनसिंह के वीरतापुर्ण युद्ध एवं बलिदान का वर्णन है।

अचलदास खींची री वचनिका: चारण कवि शिवदास गाडण द्वारा रचित इस डिंगल ग्रंथ से मांडू के सुल्तान हौशंगशाह व गागरौन के शासन अचलदास खींची के मध्य हुए युद्ध (1423ई.) तथा गागरोन के खींची शासको के बारे में संक्षिप्त जानकारी मिलती है।

बीसलदेव रासो: नरपति नाल्ह द्वारा रचित इस रासौ ग्रंथ से अजमेर के चैहान शासक बीसलदेव उर्फ विग्रहराज चतुर्थ एवं उनकी रानी (मालवा के राजा भोज की पुत्र) राजमति की प्रेमगाथा का वर्णन मिलता है।

राव जैतसी रो छंद: बीठू सूजा द्वारा रचित डिंगल भाषा के इस ग्रंथ से बीकानेर पर बाबर के पुत्र कामरान द्वारा किए गए आक्रमण एवं बीकानेर के शासक राव जैतसी (जेत्रसिंह) द्वारा उसे हराये जाने का महत्वपूर्ण वर्णन मिलता हैं।

वंश भास्कर: बूंदी के हाड़ा शासक महाराव रामसिंह के दरबारी चारण कवि सूर्यमल्ल मिश्रण द्वारा 19 वीं शताब्दी में रचित इस पिंगल काव्य ग्रंथ में बूंदी राज्य का विस्तृत, ऐतिहासिक एवं उतरी भारत का इतिहास तथा राजस्थान में मराठा विरोधी भावना का उल्लेख किया गया है। वंश भास्करको पूर्ण करने का कार्य इनके दतक पुत्र मुरारीदान ने किया था।

वीरसतसई: बूंदी के शासक महाराव रामसिंह हाड़ा के प्रसिद्ध दरबारी कवि सूर्यमल मिश्रण द्वारा रचित इस ग्रंथ से बूंदी के हाड़ा शासकों के इतिहास, उनकी उपलब्धियों व अंग्रेज विरेाधी भावना की जानकारी मिलती है। सूर्यमल मिश्रण की अन्य रचनाएं – बलवंत विलास, छंद मयूख, उम्मेदसिंह चरित्र व बुद्धसिंह चरित्र है।

चेतावनी रा चूंगट्या: राजस्थान के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी ठाकुर केसरीसिंह बारहट ने इन दोहों के माध्यम से मेवाड़ा महाराणा फतेहसिंह को वर्ष 1903 के लाॅर्ड कर्जन के दिल्ली दरबार में जाने से रोका था।

Wednesday, 3 August 2016

Most Important Questions for Government Exams (Rajasthan)

राजस्थान की पिछली पशु-धन संगणना सम्पन्न हुई–2007 में
राजस्थान पर्यटन विकास निगम लिमिटेड की स्थापना कब हुई-1 अप्रैल,
1979 मेंराजस्थान का लगभग कितने प्रतिशत भौगोलिक भाग वनाच्छादित है-7 से 9%.

गुरूशिखर की ऊँचाई है-1722 मीटर

राजस्थान के किन जिलों में कोई नदी नहीं है-बीकानेर व चूरू

राष्टिय उपभोक्ता दिवस कब मनाया जाता है- 24 दिसंबर

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम किस वर्ष का है- 1986

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम किस धारा का है-6

संगठन की एकता के सिद्वांत का अर्थ है- एक ही अधिकारी से आदेश प्राप्त करना

वैज्ञानिक प्रबंधन के जनक है- डब्लू टेलर

अनुशासन संहिता कब से लागू हुई – 1958

बच्चा दत्तक ग्रहण अवकाश से संबंधित नियम है- 103

खसंपूर्ण सेवाकाल में कितने माह का अध्ययन अवकाश मिलता है- 24 माह का

चिकित्सालय अवकाश संबधित है- नियम 105 स

ेप्राचीन सभ्यता ‘गिलूण्ड’ के अवशेष किस नदी के किनारे और किस जिले में मिले है–बनास,

राजसमन्द‘राजस्थान संगीत’ नामक पुस्तक के लेखक – सागरमल गोपा

तारीख-ए-राजस्थान के लेखक थे – कालीराय कायस्थ

‘राजरत्नाकर’ के लेखक थे –सदाशिवजयानक

भट्ट रचित ‘पृथ्वीराज विजय’ की भाषा थी –संस्कृत‘

ट्रेवल्स इन वेस्टर्न इण्डिया’ के लेखक ने राजस्थान के इतिहास को बड़ा योगदान दिया है। इनका नाम था – जेम्स टॉडस्वरूपशाही,

चांदोड़ी, शाहआलमी, ढींगला एवं सिक्काएलची किस रियासत के प्रचलित सिक्के थे –मेवाड

़राजस्थान राज्य अभिलेखागार यहां स्थित है-बीकानेर

प्राण मित्रों भले ही गंवाना, पर यह झण्डा न नीचे झुकाना’ नामक प्रसिद्ध गीत के रचयिता थे -विजयसिंह पथिक

सरदार कुदरत सिंह का सम्बन्ध किससे है-मीनाकारी

रिडकोर का कार्य है-सड़क निर्माण

राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं विनियोजन निगम लि. (रीको) के उद्देश्यों में शामिल नहीं है-लघु उद्योगों को कच्चे माल की आपूर्ति करना

खेतड़ी का तांबा संयंत्र अमेरिकी कंपनी के सहयोग से और देवारी का जस्ता संयंत्र ब्रिटेन के सहयोग से 60 के दशक में स्थापित किया गया। अब देबारी संयंत्र का अधिकांश हिस्सा इस समूह को बेच दिया गया है——वेदान्ताहिन्दुस्तान कॉपर लि.

राजस्थान में खनिज तांबे के गलन एवं शोधन का कार्य करने वाला भारत सरकार का सार्वजनिक उपक्रम है। इसका मुख्यालय कहां है——कोलकाता

2007 की पशुगणना के अनुसार राजस्थान में मुर्गियों की संख्या लगभग है———50 लाख

2007 की पशुगणना में जिस पशु की संख्या में सर्वाधिक प्रतिशत वृद्धि हुई है, वह है————–बकरी

राणा के प्रताप के प्रसिद्ध घोड़े चेतक के वंशज तैयार किये जाने की योजना चल रही है————-बीकानेर

होली के तेरह दिनों बाढ रंग तेरस पर माण्डल कस्बे में यह नृत्य किया जाता है———————–नाहर

राजस्थान में किस नदी के किनारे सवाई भोज द्वारा निर्मित मंदिर है————–खारी

राजस्थान व मध्य प्रदेश के ये जिले पड़ोसी राज्यों से दो विपरीत दिशाओं में सीमा बनाते हैं———कोटा,

रतलामईरा, चाप और मोरन, किस नदी की सहायक है————-माही

कमला व इलाइची नाम की महिला चित्रकार किस शैली से जुड़ी थी————-नाथद्वारा

दयाबाई एवं सहजोबाई का संबंध किस सम्प्रदाय से था——————-चरणदासी

किशनगढ़ चित्रशैली का प्रसिद्ध चित्रकार ‘निहालचन्द था, जिसने प्रसिद्ध ‘बनी-ठणी’ चित्र चित्रित किया।इन्हें बागड़ की मीरां कहा जाता है———–गवरी बाई

राज्य की सबसे छोटी बकरी की नस्ल है—————बारबरी

निम्न में से किस खनिज से राज्य सरकार को सर्वाधिक राजस्व मिलता है————-सीसा-जस्ता

सोनामुखी के बेहतर विपणन के लिए विशिष्ट मंडी कहां स्थापित की गई है——————जोधपुर

झीलवाड़ा की नाल या पगल्या से कौनसे दो ज़िले जुड़ते हैं——–पाली-राजसमन्द

निजी क्षेत्र में पवन ऊर्जा की पहली इकाई कहां स्थापित हुई थी और कब हुई थी———जैसलमेर, 2001

जून 2011 में सूखा सम्भाव्य क्षेत्र कार्यक्रम कितने ज़िलों में लागू रहा———11

स्व- जलधारा कार्यक्रम का उद्देश्य है————————–पेयजल सुविधा

बिजोलिया की तरह बेगूं क्षेत्र में भी किसान आंदोलन काफी प्रभावी रहा था। यहां के गोविन्दपुरा गांव में हुए गोलीकांड में दो किसान शहीद हुए थे। यह गोली कांड किस वर्ष हुआ था—————1923

पिंगल भाषा पर जिस क्षेत्र का असर पड़ा था, वह है————————–ब्रजकलख

वृद्ध सिंचाई परियोजना का संबंध किस ज़िले से है————–जयपुर

स्थानीय भाषा राजस्थान की इस महत्वपूर्ण वन उपज को ‘टिमरू’ कहते हैं———–तेंदू

Important question for RPSC/ REET/ Patwari & other government Job

यदि राजस्थान में विधान परिषद् का गठन हो जाता है, तो इसमें अधिक सेअधिक कितने सदस्य हो सकते है:- 66 ( विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 1/3 के बराबर )

राजस्थान, राज्य महिला आयोग का अध्यक्ष कौन है:- लाड कुमारी जैन

जनवरी 2012 में जयपुर में आयोजित क्रमानुसार कौनसा प्रवासी भारतीय दिवस मनाया गया :- दसवां

सयुंक्त राष्ट्र संघ में भारत का प्रतिनिधि कौन है:- हरदीप सिंह

पुरी जनगणना 2001-11 के अनुसारराजस्थान के किस जिलें में साक्षरता दर न्यूनतम है:- जालौर में

किस देश ने भारत की घेराबंदी करने हेतु ‘ मोतियों की माला की रणनीति ‘ अपनाई है:- चीन ने

वर्तमान में राजस्थान के राजकीय विद्यालयों में कौनसी अल्पसंख्यक भाषाओँ केशिक्षण की व्यवस्था है:- गुजराती, पंजाबी, उर्दू व सिन्धी

मौसर’ किसे कहा जाता है:- मृत्यु-भोज को

2001-11 के दशक के दौरान सर्वाधिक जनसँख्या वृदिवाला जिला है- जयपुर

( Note:- सर्वाधिक जनसँख्या वृदिदर वाला जिला – बाड़मेर )

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ का मुख्यालय कहाँ है:- स्विट्ज़रलैंड

मथानिया सौर ऊर्जा परियाजना स्थित है:- जोधपुर जिलें में

मथानिया सौर ऊर्जा परियाजना स्थित है:- जोधपुर जिलें में

राजस्थान की सबसे लोकप्रिय फड़ कौनसी है:- पाबूजी की फड़

घुडला त्यौहार किस क्षेत्र में मनाया जाता है:- मारवाड़

जयपुर को छोड़कर राजस्थान के किस जिलें में पुलिस कमिश्नरेट की स्थापना की गई है- जोधपुर

कंप्यूटर दिवस कब मनाया जाता है।- दो दिसंबर

भारत पहली राजनीतिक पार्टी जिसने इंटरनेट पर अपना वेबसाइट बनाया।- भारतीय जनता पार्टी

भारत की सिलिकॉन घाटी कहां पर स्थित है।- बंगलौर

भारत में पहला कंप्यूटर कहां पर लगाया गया।- बंगलौर के प्रधान डाकघर में

वर्ष 2012 के राजस्थान विधासभा के चुनावों में राज्य सभा के लिए कितने सदस्य चुने गए है:- तीन

राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान केंद्र स्थित है:- सवेर,

भरतपुर में राजस्थान में मंत्री परिषद् के सदस्यों की अधिकतम संख्या कितनी हो सकती है:- तीस

जनगणना 2001-11 के अनुसार सर्वाधिक जनसँख्या वाले चार राज्य कौन से है:- उत्तरप्रदेश , महाराष्ट्र, बिहार और पश्चिमी बंगाल

2012 में राजस्थान रत्न से किसे सम्मानित किया गया है:- पं. विश्व मोहन भट्ट को

2012 के 97 वे संविधान संशोधन में कौनसा नया मौलिक अधिकार जोड़ा गया है:- सहकारी संस्थाओं के गठन व संचालन का अधिकार

कंठ गायन कला में किस कलाकार को 2012 में राजस्थान रत्न पुरस्कार दिया गया:- जगजीत सिंह को ( ग़ज़ल गायक )

राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्यों की संख्या कौन निश्चित करता है:- राज्यपाल किया।-

1893 में मैं देश का बालू से ही कांग्रेस से भी बड़ा आंदोलन खड़ा कर दूंगा, यह कथन किसका है।- महात्मा गांधी

भारत, भारतीयों के लिए है, यह नारा दिया था।- आर्यसमाज

भारत पाकिस्तान का प्रथम युद्ध कब हुआ था।-1965

भारत व चीन में प्रथम युद्ध कब हुआ था।-1962

जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में महात्मा गांधी ने कौनसी उपाधि वापस लौटा दी।- कैसर-ए-हिंद

जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में जमनालाल बजाज ने कौनसी उपाधि वापस लौटा दी।- राय बहादुर

जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में रवींद्रनाथ टैगोर ने कौनसी उपाधि वापस लौटा दी।- सर

जलियावाला हत्याकांड कब हुआ।-13 अप्रैल 1919

गुप्त वंश का संस्थापक था।- श्रीगुप्त

खिलजी वंश का संस्थापक था।- जलालुद्दीन खिलजी

गुलाम वंश का संस्थापक था।- कुतुबुद्दीन ऐबक

बक्सर का युद्ध किसके बीच हुआ था।- अंग्रेज व मीरकासिम

स्वामी विवेकानंद को विवेकानंद की उपाधि किसने दी।- खेतड़ी महाराजा अजीतसिंह

भारत में निर्मित प्रथम कंप्यूटर का नाम क्या है।– सिद्धार्थ

प्रथम आधुनिक ओलिंपिक खेल कब शुरू हुए :- 1896

2011 में किस देश का विभाजन हुआ:- सूडान -

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